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mahabharat 5.158.31: इसी प्रकार जब मैं विराटनगर में कौरवों के साथ युद्ध में बहुत से वीर योद्धाओं के साथ अकेला युद्ध कर रहा था, उस समय मेरा सहायक कौन था?॥31॥   |   mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.158.31 
तथा विराटनगरे कुरुभि: सह संगरे।
युध्यतो बहुभिस्तत्र क: सहायोऽभवन्मम॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार जब मैं विराटनगर में कौरवों के साथ युद्ध में बहुत से वीर योद्धाओं के साथ अकेला युद्ध कर रहा था, उस समय मेरा सहायक कौन था?॥31॥
 
Similarly, when I was alone fighting with many brave warriors in the war with the Kauravas in Viratnagar, who was my helper at that time?॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)