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mahabharat 5.158.30: जब मैं निवातकवच और कालकेय नामक दैत्यों के साथ युद्ध में अकेला था, तब मेरी सहायता के लिए कौन आया था?॥30॥   |   mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.158.30 
निवातकवचैर्युद्धे कालकेयैश्च दानवै:।
तत्र मे युध्यमानस्य क: सहायस्तदाभवत्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जब मैं निवातकवच और कालकेय नामक दैत्यों के साथ युद्ध में अकेला था, तब मेरी सहायता के लिए कौन आया था?॥30॥
 
When I was fighting alone in the battle with the demons named Nivatakavacha and Kalkeya, who came to my aid?॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)