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mahabharat 5.158.3: जिन्होंने गंधमादन निवासी किंपुरुषप्रवर द्रुमा का शिष्य होकर चारों पादों से युक्त सम्पूर्ण धनुर्वेद की शिक्षा प्राप्त की थी ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.158.3 
य: किंपुरुषसिंहस्य गन्धमादनवासिन:।
कृत्स्नं शिष्यो धनुर्वेदं चतुष्पादमवाप्तवान्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जिन्होंने गंधमादन निवासी किंपुरुषप्रवर द्रुमा का शिष्य होकर चारों पादों से युक्त सम्पूर्ण धनुर्वेद की शिक्षा प्राप्त की थी ॥3॥
 
Who, being a disciple of Kimpurushpravar Druma, resident of Gandhamadan, had received the education of the complete Dhanurveda consisting of all four Padas. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)