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mahabharat 5.158.24-26h: भगवान श्रीकृष्ण के समीप धर्मराज युधिष्ठिर तथा अन्य सब राजाओं के सुनते हुए जब रुक्मी ने ऐसा कहा, तब परम बुद्धिमान कुन्तीपुत्र अर्जुन ने वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण तथा धर्मराज युधिष्ठिर की ओर देखकर मित्रतापूर्वक हँसकर कहा - 24-25 1/2   |   mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना  »  श्लोक 24-26h
 
 
श्लोक  5.158.24-26h 
इत्युक्तो धर्मराजस्य केशवस्य च संनिधौ॥ २४॥
शृण्वतां पार्थिवेन्द्राणामन्येषां चैव सर्वश:।
वासुदेवमभिप्रेक्ष्य धर्मराजं च पाण्डवम्॥ २५॥
उवाच धीमान् कौन्तेय: प्रहस्य सखिपूर्वकम्।
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण के समीप धर्मराज युधिष्ठिर तथा अन्य सब राजाओं के सुनते हुए जब रुक्मी ने ऐसा कहा, तब परम बुद्धिमान कुन्तीपुत्र अर्जुन ने वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण तथा धर्मराज युधिष्ठिर की ओर देखकर मित्रतापूर्वक हँसकर कहा - 24-25 1/2
 
In the hearing of Dharmaraja Yudhishthira and all the other kings near Lord Shri Krishna, when Rukmi said this, the most intelligent Kunti's son Arjun, looking at Vasudevanandan Shri Krishna and Dharmaraja Yudhishthira, laughed in a friendly manner and said - 24-25 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)