Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.158.23-24h: मैं किसी को भी जीवित नहीं छोड़ूँगा, चाहे द्रोणाचार्य, कृपाचार्य तथा वीर भीष्म और कर्ण मेरे पक्ष में ही क्यों न हों। अथवा ये सब राजा जो यहाँ आए हैं, चुपचाप खड़े रहें। मैं अकेला ही रणभूमि में तुम्हारे समस्त शत्रुओं का वध करके तुम्हें पृथ्वी का राज्य प्रदान करूँगा।॥23॥ | mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपि द्रोणकृपौ वीरौ भीष्मकर्णावथो पुन:।
अथवा सर्व एवैते तिष्ठन्तु वसुधाधिपा:॥ २३॥
निहत्य समरे शत्रूंस्तव दास्यामि मेदिनीम्।
अनुवाद
मैं किसी को भी जीवित नहीं छोड़ूँगा, चाहे द्रोणाचार्य, कृपाचार्य तथा वीर भीष्म और कर्ण मेरे पक्ष में ही क्यों न हों। अथवा ये सब राजा जो यहाँ आए हैं, चुपचाप खड़े रहें। मैं अकेला ही रणभूमि में तुम्हारे समस्त शत्रुओं का वध करके तुम्हें पृथ्वी का राज्य प्रदान करूँगा।॥23॥
I will not leave anyone alive, even if Dronacharya, Krupacharya and the brave Bhishma and Karna are on my side. Or all these kings who have come here will stand silently. I alone will kill all your enemies in the battlefield and give you the kingdom of the earth.'॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥