Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.158.20-21: तत्पश्चात्, योद्धाओं के मध्य में बैठकर उन्होंने कुन्तीपुत्र अर्जुन से कहा - 'पाण्डुपुत्र! यदि तुम भयभीत हो, तो मैं युद्ध में तुम्हारी सहायता करने आया हूँ। मैं इस महायुद्ध में तुम्हारी ऐसी सहायता करूँगा कि वह तुम्हारे शत्रुओं के लिए असहनीय हो जाएगा।' | mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उवाच मध्ये वीराणां कुन्तीपुत्रं धनंजयम्॥ २०॥
सहायोऽस्मि स्थितो युद्धे यदि भीतोऽसि पाण्डव।
करिष्यामि रणे साह्यमसह्यं तव शत्रुभि:॥ २१॥
अनुवाद
तत्पश्चात्, योद्धाओं के मध्य में बैठकर उन्होंने कुन्तीपुत्र अर्जुन से कहा - 'पाण्डुपुत्र! यदि तुम भयभीत हो, तो मैं युद्ध में तुम्हारी सहायता करने आया हूँ। मैं इस महायुद्ध में तुम्हारी ऐसी सहायता करूँगा कि वह तुम्हारे शत्रुओं के लिए असहनीय हो जाएगा।'
Thereafter, sitting in the midst of the warriors, he said to Arjun, the son of Kunti - 'Son of Pandu! If you are afraid, then I have come to help you in the war. I will help you in this great war in such a way that it will become unbearable for your enemies.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥