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mahabharat 5.158.18-19h: वे वसुदेवपुत्र भगवान कृष्ण को प्रसन्न करने की इच्छा से आये थे। पांडवों को उनके आगमन की सूचना मिली, तो राजा युधिष्ठिर उनके स्वागत के लिए आगे बढ़े और उनका उचित सम्मान किया।   |   mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  5.158.18-19h 
विदित: पाण्डवेयानां वासुदेवप्रियेप्सया॥ १८॥
युधिष्ठिरस्तु तं राजा प्रत्युद्‍गम्याभ्यपूजयत्।
 
 
अनुवाद
वे वसुदेवपुत्र भगवान कृष्ण को प्रसन्न करने की इच्छा से आये थे। पांडवों को उनके आगमन की सूचना मिली, तो राजा युधिष्ठिर उनके स्वागत के लिए आगे बढ़े और उनका उचित सम्मान किया।
 
He had come with the desire to please Lord Krishna, the son of Vasudeva. The Pandavas were informed about his arrival, then King Yudhishthira went forward to receive him and gave him due respect. 18 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)