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mahabharat 5.158.17-18h: कवच, धनुष, दस्ताने, तलवार और तरकश धारण करके सूर्य के समान तेजस्वी ध्वज लेकर वे पाण्डवों की विशाल सेना में घुसे।   |   mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  5.158.17-18h 
तत: स कवची धन्वी तली खड्गी शरासनी॥ १७॥
ध्वजेनादित्यवर्णेन प्रविवेश महाचमूम्।
 
 
अनुवाद
कवच, धनुष, दस्ताने, तलवार और तरकश धारण करके सूर्य के समान तेजस्वी ध्वज लेकर वे पाण्डवों की विशाल सेना में घुसे।
 
Wearing armour, bow, gloves, sword and quiver, he entered the huge army of the Pandavas carrying a flag as bright as the sun. 17 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)