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mahabharat 5.158.15-16h: हे राजन! भोजकट नामक वह नगर, जो हाथियों और घोड़ों की विशाल सेना के कारण संसार भर में प्रसिद्ध है।   |   mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  5.158.15-16h 
सैन्येन महा तेन प्रभूतगजवाजिना॥ १५॥
पुरं तद् भुवि विख्यातं नाम्ना भोजकटं नृप।
 
 
अनुवाद
हे राजन! भोजकट नामक वह नगर, जो हाथियों और घोड़ों की विशाल सेना के कारण संसार भर में प्रसिद्ध है।
 
O King! That city named Bhojkat which is well-known throughout the world for having a large army of elephants and horses. 15 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)