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mahabharat 5.158.14-15h: जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले रुक्मी को युद्ध में परास्त किया था, वहीं रुक्मी ने भोजकट नामक सुन्दर नगर बसाया था ॥14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  5.158.14-15h 
यत्रैव कृष्णेन रणे निर्जित: परवीरहा॥ १४॥
तत्र भोजकटं नाम कृतं नगरमुत्तमम्।
 
 
अनुवाद
जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले रुक्मी को युद्ध में परास्त किया था, वहीं रुक्मी ने भोजकट नामक सुन्दर नगर बसाया था ॥14 1/2॥
 
Where Lord Krishna had defeated Rukmi, who was killing enemy warriors, in the war, Rukmi established a beautiful city named Bhojkat. 14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)