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mahabharat 5.158.13-14h: राजन! योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के पास पहुँचकर उनसे पराजित होने के कारण लज्जित हुए, वे पुनः कुण्डिनपुर नहीं लौटे। 13 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  5.158.13-14h 
स समासाद्य वार्ष्णेयं योगानामीश्वरं प्रभुम्॥ १३॥
व्यंसितो व्रीडितो राजन् नाजगाम स कुण्डिनम्।
 
 
अनुवाद
राजन! योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के पास पहुँचकर उनसे पराजित होने के कारण लज्जित हुए, वे पुनः कुण्डिनपुर नहीं लौटे। 13 1/2॥
 
Rajan! Yogeshwar reached Lord Krishna and felt ashamed of being defeated by him, he did not return to Kundinpur again. 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)