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mahabharat 5.158.12-13h: उस समय उसके पास चार दलों वाली एक विशाल सेना थी, जो विचित्र अस्त्र-शस्त्रों और कवचों से सुसज्जित थी, जो दूर तक लक्ष्य भेदने में समर्थ थी और जो उफनती हुई गंगा के समान विशाल थी॥12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  5.158.12-13h 
सेनया चतुरङ्गिण्या महत्या दूरपातया॥ १२॥
विचित्रायुधवर्मिण्या गङ्गयेव प्रवृद्धया।
 
 
अनुवाद
उस समय उसके पास चार दलों वाली एक विशाल सेना थी, जो विचित्र अस्त्र-शस्त्रों और कवचों से सुसज्जित थी, जो दूर तक लक्ष्य भेदने में समर्थ थी और जो उफनती हुई गंगा के समान विशाल थी॥12 1/2॥
 
At that time he had with him a huge army of four divisions, adorned with strange weapons and armour, capable of hitting targets at long distances and as large as the surging Ganga.॥ 12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)