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mahabharat 5.158.11-12h: वह समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ था। उसने श्रीकृष्ण का पीछा करते हुए प्रतिज्ञा की थी कि वह उन्हें मारे बिना अपने नगर को वापस नहीं लौटेगा। 11 1/2   |   mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  5.158.11-12h 
कृत्वा प्रतिज्ञां नाहत्वा निवर्तिष्ये जनार्दनम्॥ ११॥
ततोऽन्वधावद् वार्ष्णेयं सर्वशस्त्रभृतां वर:।
 
 
अनुवाद
वह समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ था। उसने श्रीकृष्ण का पीछा करते हुए प्रतिज्ञा की थी कि वह उन्हें मारे बिना अपने नगर को वापस नहीं लौटेगा। 11 1/2
 
He was the best among all the weapon bearers. He had pursued Shri Krishna by taking a vow that he would not return to his city without killing him. 11 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)