Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.158.10-11h: यह वही वीर रुक्मी था, जो अपने बाहुबल के अभिमान के कारण परम बुद्धिमान भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मिणी का हरण सहन न कर सका था ॥10 1/2॥ | mahabharat अध्याय 5.158: रुक्मीका सहायता देनेके लिये आना; परंतु पाण्डव और कौरव दोनों पक्षोंके द्वारा कोरा उत्तर पाकर लौट जाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नामृष्यत पुरा योऽसौ स्वबाहुबलगर्वित:॥ १०॥
रुक्मिण्या हरणं वीरो वासुदेवेन धीमता।
अनुवाद
यह वही वीर रुक्मी था, जो अपने बाहुबल के अभिमान के कारण परम बुद्धिमान भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मिणी का हरण सहन न कर सका था ॥10 1/2॥
This was the same brave Rukmi, who due to the pride of his muscle power, could not tolerate the kidnapping of Rukmini by the most intelligent Lord Shri Krishna. 10 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥