कृष्ण उवाच
यथार्हति भवान् वक्तुमस्मिन् काले ह्युपस्थिते।
तथेदमर्थवद् वाक्यमुक्तं ते भरतर्षभ॥ ९॥
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण बोले - हे भरतवंशी भूषण! आपने यह सार्थक बात उसी प्रकार कही है, जिस प्रकार ऐसे अवसर आने पर कहनी चाहिए॥9॥
Lord Krishna said - O Bhushan of the Bharata clan! You have said this meaningful thing in the same way as you should say when such an occasion arises.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥