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mahabharat 5.157.34: अतः मैं सरस्वती नदी के तट पर स्थित तीर्थों का दर्शन करने जाऊँगा, क्योंकि जब मैं कुरुवंश को उस अवस्था में नष्ट होते देखूँगा, तो उनकी उपेक्षा नहीं कर सकूँगा। ॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 5.157: युधिष्ठिरके द्वारा अपने सेनापतियोंका अभिषेक, यदुवंशियोंसहित बलरामजीका आगमन तथा पाण्डवोंसे विदा लेकर उनका तीर्थयात्राके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 157: युधिष्ठिरके द्वारा अपने सेनापतियोंका अभिषेक, यदुवंशियोंसहित बलरामजीका आगमन तथा पाण्डवोंसे विदा लेकर उनका तीर्थयात्राके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.157.34 
तस्माद् यास्यामि तीर्थानि सरस्वत्या निषेवितुम्।
न हि शक्ष्यामि कौरव्यान् नश्यमानानुपेक्षितुम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
अतः मैं सरस्वती नदी के तट पर स्थित तीर्थों का दर्शन करने जाऊँगा, क्योंकि जब मैं कुरुवंश को उस अवस्था में नष्ट होते देखूँगा, तो उनकी उपेक्षा नहीं कर सकूँगा। ॥ 34॥
 
"Therefore I will go to visit the holy places situated on the banks of river Sarasvati because I will not be able to ignore the Kuru dynasty when I see them perishing in that state." ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)