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mahabharat 5.157.32: मैं श्रीकृष्ण के बिना इस सम्पूर्ण जगत् को देख भी नहीं सकता; इसलिए केशव जो कुछ करना चाहते हैं, मैं उसी का अनुसरण करता हूँ॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 5.157: युधिष्ठिरके द्वारा अपने सेनापतियोंका अभिषेक, यदुवंशियोंसहित बलरामजीका आगमन तथा पाण्डवोंसे विदा लेकर उनका तीर्थयात्राके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 157: युधिष्ठिरके द्वारा अपने सेनापतियोंका अभिषेक, यदुवंशियोंसहित बलरामजीका आगमन तथा पाण्डवोंसे विदा लेकर उनका तीर्थयात्राके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.157.32 
न चाहमुत्सहे कृष्णमृते लोकमुदीक्षितुम्।
ततोऽहमनुवर्तामि केशवस्य चिकीर्षितम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
मैं श्रीकृष्ण के बिना इस सम्पूर्ण जगत् को देख भी नहीं सकता; इसलिए केशव जो कुछ करना चाहते हैं, मैं उसी का अनुसरण करता हूँ॥ 32॥
 
I cannot even look at this whole universe without Shri Krishna; therefore, whatever Kesava wants to do, I follow that.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)