श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 157: युधिष्ठिरके द्वारा अपने सेनापतियोंका अभिषेक, यदुवंशियोंसहित बलरामजीका आगमन तथा पाण्डवोंसे विदा लेकर उनका तीर्थयात्राके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.157.27 
समेतं पार्थिवं क्षत्रं कालपक्वमसंशयम्।
विमर्दश्च महान् भावी मांसशोणितकर्दम:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि यहाँ एकत्रित हुए सभी क्षत्रिय राजाओं को काल ने अपना ग्रास बनाने के लिए पका लिया है। अब महासंहार होने वाला है। उसमें रक्त और मांस की गंदगी हो जाएगी॥ 27॥
 
‘There is no doubt that all the Kshatriya kings gathered here have been cooked by Kaal to make them his prey. A great massacre is about to take place. Blood and flesh will become a filth in it.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)