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mahabharat 5.156.26: वैशम्पायन कहते हैं, "हे जनमेजय! तत्पश्चात धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन ने विधिपूर्वक भीष्म का सेनापति पद पर अभिषेक किया, जिन्होंने उन्हें बहुत बड़ी दक्षिणा दी। अभिषेक के बाद वे अत्यंत शोभायमान हो रहे थे।"   |   mahabharat अध्याय 5.156: दुर्योधनके द्वारा भीष्मजीका प्रधान सेनापतिके पदपर अभिषेक और कुरुक्षेत्रमें पहुँचकर शिविर-निर्माण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 156: दुर्योधनके द्वारा भीष्मजीका प्रधान सेनापतिके पदपर अभिषेक और कुरुक्षेत्रमें पहुँचकर शिविर-निर्माण  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.156.26 
वैशम्पायन उवाच
तत: सेनापतिं चक्रे विधिवद् भूरिदक्षिणम्।
धृतराष्ट्रात्मजो भीष्मं सोऽभिषिक्तो व्यरोचत॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं, "हे जनमेजय! तत्पश्चात धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन ने विधिपूर्वक भीष्म का सेनापति पद पर अभिषेक किया, जिन्होंने उन्हें बहुत बड़ी दक्षिणा दी। अभिषेक के बाद वे अत्यंत शोभायमान हो रहे थे।"
 
Vaishampayana says, 'O Janamejaya! Thereafter, Duryodhan, son of Dhritarashtra, duly anointed Bhishma, who gave a large dakshina, as the Commander in Chief. After the anointment, he looked very splendid.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)