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mahabharat 5.156.21-22: परन्तु हे राजन! मैं किसी भी प्रकार पाण्डुपुत्रों का वध नहीं करूँगा। हे कुरुपुत्र! यदि पाण्डव इस युद्ध में पहले मुझे नहीं मारेंगे, तो मैं अपने अस्त्रों से प्रतिदिन उनके पक्ष के दस हजार योद्धाओं का वध करूँगा। इस प्रकार उनकी सेना का विनाश करूँगा। 21-22   |   mahabharat अध्याय 5.156: दुर्योधनके द्वारा भीष्मजीका प्रधान सेनापतिके पदपर अभिषेक और कुरुक्षेत्रमें पहुँचकर शिविर-निर्माण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 156: दुर्योधनके द्वारा भीष्मजीका प्रधान सेनापतिके पदपर अभिषेक और कुरुक्षेत्रमें पहुँचकर शिविर-निर्माण  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  5.156.21-22 
न त्वेवोत्सादनीया मे पाण्डो: पुत्रा जनाधिप।
तस्माद् योधान् हनिष्यामि प्रयोगेणायुतं सदा॥ २१॥
एवमेषां करिष्यामि निधनं कुरुनन्दन।
न चेत् ते मां हनिष्यन्ति पूर्वमेव समागमे॥ २२॥
 
 
अनुवाद
परन्तु हे राजन! मैं किसी भी प्रकार पाण्डुपुत्रों का वध नहीं करूँगा। हे कुरुपुत्र! यदि पाण्डव इस युद्ध में पहले मुझे नहीं मारेंगे, तो मैं अपने अस्त्रों से प्रतिदिन उनके पक्ष के दस हजार योद्धाओं का वध करूँगा। इस प्रकार उनकी सेना का विनाश करूँगा। 21-22
 
But, O king, I will not kill the sons of Pandu in any way. O son of Kuru! If the Pandavas do not kill me first in this war, then I will kill ten thousand warriors of their side every day by using my weapons. I will destroy their army in this way. 21-22
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)