श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 156: दुर्योधनके द्वारा भीष्मजीका प्रधान सेनापतिके पदपर अभिषेक और कुरुक्षेत्रमें पहुँचकर शिविर-निर्माण  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.156.10 
एवं ये कुशलं शूरं हितेप्सितमकल्मषम्।
सेनापतिं प्रकुर्वन्ति ते जयन्ति रणे रिपून्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जो लोग शुभचिंतक, पापरहित और युद्धकुशल योद्धा को अपना सेनापति बनाते हैं, वे युद्ध में अपने शत्रुओं पर अवश्य विजय प्राप्त करते हैं॥10॥
 
Thus, those who make a well-wisher, sinless and war-skilled warrior as their commander, are sure to win over their enemies in the war.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)