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श्लोक  5.155.34 
दिवसे दिवसे तेषां प्रतिवेलं च भारत।
चक्रे स विविधा: पूजा: प्रत्यक्षं च पुन: पुन:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
भरत! दुर्योधन प्रतिदिन और हर समय विभिन्न प्रकार से उन सेनापतियों की पूजा करता था।
 
Bhaarata! Duryodhana used to worship those generals in various ways every day and at every time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)