Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.155.3-9: उन सभी योद्धाओं के पास अनुकरसा (रथ की मरम्मत के लिए उसके नीचे बाँधी जाने वाली लकड़ी), तरकस, वरूथ (रथ को ढकने के लिए व्याघ्र चर्म आदि), उपसंग (हाथी या घोड़े द्वारा उठाए जाने वाले तरकस), तोमर, शक्ति, निशंग (पैदल सैनिकों द्वारा उठाए जाने वाले तरकस), ऋष्टि (एक प्रकार की लोहे की छड़ी), ध्वजा, पताका, धनुष-बाण, नाना प्रकार की रस्सियाँ, पाश, बिछौना, कचग्राह-विक्षेप (शत्रु के बाल पकड़कर गिराने का यंत्र), तेल, गुड़, रेत, विषैले साँपों के बर्तन, राल का चूर्ण, घण्टाफलक (घंटियों वाली ढाल), तलवार आदि लोहे के हथियार, गुड़ मिला हुआ जल, ढेले, साल, भिण्डीपाल (गेंदें), मोम से लिपटे हथौड़े, काँटेदार लकड़ियाँ, हल, विषबुझे बाण, फटकने की टोकरियाँ और टोकरियाँ, दरांती, अंकुश, तोमर, काँटेदार कवच, परकार, आरी आदि से सुसज्जित थे। गैंडे की खाल, भाले, सींग, बरछे, विभिन्न हथियार, कुल्हाड़ी, कुदाल, तेल और घी में भिगोए हुए रेशमी कपड़े। 3-9. | mahabharat अध्याय 5.155: दुर्योधनके द्वारा सेनाओंका विभाजन और पृथक्-पृथक् अक्षौहिणियोंके सेनापतियोंका अभिषेक । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन सभी योद्धाओं के पास अनुकरसा (रथ की मरम्मत के लिए उसके नीचे बाँधी जाने वाली लकड़ी), तरकस, वरूथ (रथ को ढकने के लिए व्याघ्र चर्म आदि), उपसंग (हाथी या घोड़े द्वारा उठाए जाने वाले तरकस), तोमर, शक्ति, निशंग (पैदल सैनिकों द्वारा उठाए जाने वाले तरकस), ऋष्टि (एक प्रकार की लोहे की छड़ी), ध्वजा, पताका, धनुष-बाण, नाना प्रकार की रस्सियाँ, पाश, बिछौना, कचग्राह-विक्षेप (शत्रु के बाल पकड़कर गिराने का यंत्र), तेल, गुड़, रेत, विषैले साँपों के बर्तन, राल का चूर्ण, घण्टाफलक (घंटियों वाली ढाल), तलवार आदि लोहे के हथियार, गुड़ मिला हुआ जल, ढेले, साल, भिण्डीपाल (गेंदें), मोम से लिपटे हथौड़े, काँटेदार लकड़ियाँ, हल, विषबुझे बाण, फटकने की टोकरियाँ और टोकरियाँ, दरांती, अंकुश, तोमर, काँटेदार कवच, परकार, आरी आदि से सुसज्जित थे। गैंडे की खाल, भाले, सींग, बरछे, विभिन्न हथियार, कुल्हाड़ी, कुदाल, तेल और घी में भिगोए हुए रेशमी कपड़े। 3-9.
All those warriors had Anukarsa (wood tied under the chariot for repairing it), quivers, varutha (tiger skin etc. to cover the chariot), Upasanga (quivers that can be lifted by elephants or horses), Tomar, Shakti, Nishang (quivers carried by footmen), Rishti (a kind of iron stick), flag, banner, bow and arrow, various kinds of ropes, noose, bedding, Kachgraha-Vikshep (instrument for catching the hair and making the enemy fall), oil, jaggery, sand, pots of poisonous snakes, resin powder, Ghantaphalak (shield with bells), iron weapons like sword, water mixed with jaggery, clods, sal, Bhindipal (balls), wax coated hammers, thorny sticks, plough, poisoned arrows, winnowing baskets and baskets, sickle, goad, tomar, thorny They were equipped with armour, compasses, saws, etc., chariots covered with tiger and rhinoceros skins, spears, horns, lances, various weapons, axes, hoes, silken clothes soaked in oil and ghee. 3-9.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥