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श्लोक  5.155.1 
वैशम्पायन उवाच
व्युष्टायां वै रजन्यां हि राजा दुर्योधनस्तत:।
व्यभजत् तान्यनीकानि दश चैकं च भारत॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! जब रात्रि बीत गई और प्रातःकाल हुआ, तब राजा दुर्योधन ने अपनी ग्यारह अक्षौहिणी सेनाएँ बाँट दीं।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! When the night passed and it was morning, King Duryodhan divided his eleven Akshauhini armies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)