Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.154.9: दुष्टबुद्धि वाला दुर्योधन कर्ण का आश्रय लेकर सब कुछ अपना ही समझता है, इसलिए वह न तो धर्म की इच्छा रखता है और न यश की।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 5.154: युधिष्ठिरका भगवान‍् श्रीकृष्णसे अपने समयोचित कर्तव्यके विषयमें पूछना, भगवान‍्का युद्धको ही कर्तव्य बताना तथा इस विषयमें युधिष्ठिरका संताप और अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका समर्थन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भगवान‍् श्रीकृष्णसे अपने समयोचित कर्तव्यके विषयमें पूछना, भगवान‍्का युद्धको ही कर्तव्य बताना तथा इस विषयमें युधिष्ठिरका संताप और अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका समर्थन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.154.9 
नैष कामयते धर्मं नैष कामयते यश:।
जितं स मन्यते सर्वं दुरात्मा कर्णमाश्रित:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
दुष्टबुद्धि वाला दुर्योधन कर्ण का आश्रय लेकर सब कुछ अपना ही समझता है, इसलिए वह न तो धर्म की इच्छा रखता है और न यश की।॥9॥
 
The evil-minded Duryodhan, taking refuge in Karna, considers everything as his own. That is why he neither desires Dharma nor fame.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)