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कृष्ण उवाच
उक्तवानस्मि यद् वाक्यं धर्मार्थसहितं हितम्।
न तु तन्निकृतिप्रज्ञे कौरव्ये प्रतितिष्ठति॥ ७॥
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले - मैंने जो धर्म और अर्थ पर आधारित हितकर उपदेश कहा है, वह केवल छल-कपट में कुशल दुर्योधन के मन में नहीं बैठता।
Shri Krishna said - The beneficial advice that I have said, which is based on Dharma and Artha, does not sit in the mind of Duryodhan, who is skilled only in deceit and fraud. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥