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mahabharat 5.154.24: वे कहने लगे - 'राजन्! माता कुन्ती और विदुरजी द्वारा कहे गए जो वचन देवकीनन्दन श्रीकृष्ण ने आपसे कहे थे, उन पर आपने अवश्य ही पूर्ण विचार किया होगा॥24॥   |   mahabharat अध्याय 5.154: युधिष्ठिरका भगवान‍् श्रीकृष्णसे अपने समयोचित कर्तव्यके विषयमें पूछना, भगवान‍्का युद्धको ही कर्तव्य बताना तथा इस विषयमें युधिष्ठिरका संताप और अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका समर्थन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भगवान‍् श्रीकृष्णसे अपने समयोचित कर्तव्यके विषयमें पूछना, भगवान‍्का युद्धको ही कर्तव्य बताना तथा इस विषयमें युधिष्ठिरका संताप और अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका समर्थन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.154.24 
उक्तवान् देवकीपुत्र: कुन्त्याश्च विदुरस्य च।
वचनं तत् त्वया राजन् निखिलेनावधारितम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
वे कहने लगे - 'राजन्! माता कुन्ती और विदुरजी द्वारा कहे गए जो वचन देवकीनन्दन श्रीकृष्ण ने आपसे कहे थे, उन पर आपने अवश्य ही पूर्ण विचार किया होगा॥24॥
 
They started saying – 'King! You must have completely considered the words that Devkinandan Shri Krishna had narrated to you, said by Mother Kunti and Vidurji. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)