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mahabharat 5.154.22: जो मारने योग्य नहीं हैं, उनके साथ युद्ध करना कैसे उचित होगा? वृद्ध और गुणवान लोगों को मारकर हम विजय कैसे प्राप्त करेंगे?॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 5.154: युधिष्ठिरका भगवान‍् श्रीकृष्णसे अपने समयोचित कर्तव्यके विषयमें पूछना, भगवान‍्का युद्धको ही कर्तव्य बताना तथा इस विषयमें युधिष्ठिरका संताप और अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका समर्थन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भगवान‍् श्रीकृष्णसे अपने समयोचित कर्तव्यके विषयमें पूछना, भगवान‍्का युद्धको ही कर्तव्य बताना तथा इस विषयमें युधिष्ठिरका संताप और अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका समर्थन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.154.22 
कथं ह्यवध्यै: संग्राम: कार्य: सह भविष्यति।
कथं हत्वा गुरून् वृद्धान् विजयो नो भविष्यति॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जो मारने योग्य नहीं हैं, उनके साथ युद्ध करना कैसे उचित होगा? वृद्ध और गुणवान लोगों को मारकर हम विजय कैसे प्राप्त करेंगे?॥ 22॥
 
How will it be proper to fight with those who are not worth killing? How will we achieve victory by killing old and virtuous people?॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)