Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.154.15: हम लोग भी इतना त्याग करके (सब कुछ खोकर) किसी भी स्थिति में कौरवों के साथ संधि नहीं करना चाहते। अतः इसके बाद युद्ध करना ही उचित है॥15॥ | mahabharat अध्याय 5.154: युधिष्ठिरका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने समयोचित कर्तव्यके विषयमें पूछना, भगवान्का युद्धको ही कर्तव्य बताना तथा इस विषयमें युधिष्ठिरका संताप और अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका समर्थन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न चापि वयमत्यर्थं परित्यागेन कर्हिचित्।
कौरवै: शममिच्छामस्तत्र युद्धमनन्तरम्॥ १५॥
अनुवाद
हम लोग भी इतना त्याग करके (सब कुछ खोकर) किसी भी स्थिति में कौरवों के साथ संधि नहीं करना चाहते। अतः इसके बाद युद्ध करना ही उचित है॥15॥
We too, after sacrificing so much (losing everything) do not wish to enter into a treaty with the Kauravas under any circumstances. Hence, it is appropriate for us to fight the war after this.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥