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mahabharat 5.154.13: जो कुछ उन लोगों ने कहा, उसे यहाँ दोहराने से क्या लाभ? केवल इतना ही समझ लो कि वह दुष्टचित्त कौरव तुम्हारे प्रति न्यायपूर्ण व्यवहार नहीं कर रहा है॥13॥   |   mahabharat अध्याय 5.154: युधिष्ठिरका भगवान‍् श्रीकृष्णसे अपने समयोचित कर्तव्यके विषयमें पूछना, भगवान‍्का युद्धको ही कर्तव्य बताना तथा इस विषयमें युधिष्ठिरका संताप और अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका समर्थन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भगवान‍् श्रीकृष्णसे अपने समयोचित कर्तव्यके विषयमें पूछना, भगवान‍्का युद्धको ही कर्तव्य बताना तथा इस विषयमें युधिष्ठिरका संताप और अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका समर्थन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.154.13 
किं च तेन मयोक्तेन यान्यभाषत कौरव:।
संक्षेपेण दुरात्मासौ न युक्तं त्वयि वर्तते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जो कुछ उन लोगों ने कहा, उसे यहाँ दोहराने से क्या लाभ? केवल इतना ही समझ लो कि वह दुष्टचित्त कौरव तुम्हारे प्रति न्यायपूर्ण व्यवहार नहीं कर रहा है॥13॥
 
What is the use of repeating here whatever those people said? Just understand this in brief that that evil-minded Kaurava is not behaving justly towards you.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)