श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 153: दुर्योधनका सेनाको सुसज्जित होने और शिविर-निर्माण करनेके लिये आज्ञा देना तथा सैनिकोंकी रणयात्राके लिये तैयारी  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.153.9 
अकृतेनैव कार्येण गत: पार्थानधोक्षज:।
स एनान्मन्युनाऽऽविष्टो ध्रुवं धक्ष्यत्यसंशयम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण अपना कार्य पूरा करके यहाँ से नहीं गए हैं। इसके लिए वे क्रोध में आकर पाण्डवों को अवश्य ही युद्ध के लिए उकसाएँगे, इसमें तनिक भी संदेह नहीं है॥9॥
 
Sri Krishna has not gone from here having accomplished his task. For this he will certainly provoke the Pandavas to a war in anger, there is no doubt about it at all.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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