श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 153: दुर्योधनका सेनाको सुसज्जित होने और शिविर-निर्माण करनेके लिये आज्ञा देना तथा सैनिकोंकी रणयात्राके लिये तैयारी  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.153.24 
तदुत्सव इवोदग्रं सम्प्रहृष्टनरावृतम्।
नगरं धार्तराष्ट्रस्य भारतासीत् समाकुलम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! दुर्योधन का नगर हस्तिनापुर हर्ष और प्रसन्नता से भरे हुए लोगों से भरा हुआ था, मानो वहाँ कोई उत्सव हो रहा हो। वहाँ महान कोलाहल मचा हुआ था॥24॥
 
Janamejaya! Duryodhan's city Hastinapur was filled with people who were full of joy and happiness, as if there was some festival going on there. There was a great commotion there. ॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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