vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 153: दुर्योधनका सेनाको सुसज्जित होने और शिविर-निर्माण करनेके लिये आज्ञा देना तथा सैनिकोंकी रणयात्राके लिये तैयारी
»
श्लोक 12
श्लोक
5.153.12
विराटद्रुपदौ चैव कृतवैरौ मया सह।
तौ च सेनाप्रणेतारौ वासुदेववशानुगौ॥ १२॥
अनुवाद
विराट और द्रुपद तो पहले से ही मुझसे शत्रुता रखते हैं। वे दोनों पाण्डव सेना के सेनापति हैं और श्रीकृष्ण की आज्ञा में हैं॥12॥
Virat and Drupada are already hostile towards me. Both of them are the commanders of the Pandava army and are under the command of Shri Krishna.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×