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श्लोक 5.151.d1  |
(वैशम्पायन उवाच
अर्जुनेनैवमुक्ते तु भीमो वाक्यं समाददे॥ ) |
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| अनुवाद |
| वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! अर्जुन के ऐसा कहने पर भीमसेन ने इस प्रकार अपने विचार प्रकट किये। |
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| Vaishampayana says- Janamejaya! When Arjuna said this, Bhimasena expressed his thoughts in this manner. |
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