शङ्खदुन्दुभिसंसृष्ट: सिंहनादस्तरस्विनाम्।
पृथिवीं चान्तरिक्षं च सागरांश्चान्वनादयत्॥ ७१॥
अनुवाद
शंख और नगाड़ों की ध्वनि के साथ मिलकर पराक्रमी योद्धाओं की गर्जना पृथ्वी, आकाश और समुद्र में फैल गई और उन सबमें गूंजने लगी।
The roar of the mighty warriors, mingled with the sound of conches and drums, spread across the earth, sky and the oceans and began to echo across them all. 71.
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि सैन्यनिर्याणपर्वणि कुरुक्षेत्रप्रवेशे एकपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत सैन्यनिर्याणपर्वमें पाण्डवसेनाका कुरुक्षेत्रमें प्रवेशविषयक एक सौ इक्यावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५१॥
[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ७१ १/२ श्लोक हैं।]
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥