श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 151: पाण्डवपक्षके सेनापतिका चुनाव तथा पाण्डव-सेनाका कुरुक्षेत्रमें प्रवेश  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  5.151.7-8 
इष्वस्त्रकुशला: सर्वे तथा सर्वास्त्रयोधिन:।
सप्तानामपि यो नेता सेनानां प्रविभागवित्॥ ७॥
य: सहेत रणे भीष्मं शरार्चि: पावकोपमम्।
तं तावत् सहदेवात्र प्रब्रूहि कुरुनन्दन।
स्वमतं पुरुषव्याघ्र को न: सेनापति: क्षम:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
ये सभी धनुर्वेद में पारंगत हैं और सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से युद्ध करने में समर्थ हैं। अब हमें विचार करना चाहिए कि इन सातों का सेनापति कौन हो? जो समस्त सेना-विभागों को भली-भाँति जानता हो और युद्ध में बाणों की ज्वालाओं से प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी भीष्म के प्रहार का सामना कर सके। हे कुरुपुत्र सहदेव! नरसिंह! पहले तुम अपना मत प्रकट करो। हमारा प्रधान सेनापति कौन होने के योग्य है?' 7-8।
 
‘All of them have attained proficiency in Dhanur Veda and are capable of fighting with all types of weapons. Now we should think about who should be the leader of these seven? Who knows all the army divisions well and who can withstand the attack of Bhishma who is as radiant as fire blazing with the flames of arrows in the war. Man-lion, son of Kuru, Sahadeva! First you express your opinion. Who is worthy of being our chief commander? 7-8.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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