श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 151: पाण्डवपक्षके सेनापतिका चुनाव तथा पाण्डव-सेनाका कुरुक्षेत्रमें प्रवेश  »  श्लोक 65-66
 
 
श्लोक  5.151.65-66 
जघनार्धे विराटश्च याज्ञसेनिश्च सौमकि:।
सुधर्मा कुन्तिभोजश्च धृष्टद्युम्नस्य चात्मजा:॥ ६५॥
रथायुतानि चत्वारि हया: पञ्चगुणास्तथा।
पत्तिसैन्यं दशगुणं गजानामयुतानि षट्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
सेना के पिछले भाग में राजा विराट, सोमवंशी द्रुपदकुमार धृष्टद्युम्न, सुधर्मा, कुंतीभोज और धृष्टद्युम्नपुत्र थे। उनके साथ चालीस हज़ार रथ, दो लाख घोड़े, चार लाख पैदल सैनिक और साठ हज़ार हाथी थे। 65-66.
 
In the rear half of the army were King Virata, Somkavanshi Drupadakumara Dhrishtadyumna, Sudharma, Kunti Bhoja and Dhrishtadyumna's son. Along with them were forty thousand chariots, two lakh horses, four lakh infantry and sixty thousand elephants. 65-66.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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