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mahabharat 5.151.63-64: केकयराज धृष्टकेतु, काशीराज के पुत्र अभिभु, श्रीनिमान्, वसुदान और अपराजित वीर शिखण्डी, ये सभी पाँचों भाई, आभूषण और कवच धारण किये हुए, हाथों में शस्त्र लिये हुए, हर्ष और प्रसन्नता में भरे हुए, राजा युधिष्ठिर को चारों ओर से घेरकर उनके साथ चल रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 5.151: पाण्डवपक्षके सेनापतिका चुनाव तथा पाण्डव-सेनाका कुरुक्षेत्रमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 151: पाण्डवपक्षके सेनापतिका चुनाव तथा पाण्डव-सेनाका कुरुक्षेत्रमें प्रवेश  »  श्लोक 63-64
 
 
श्लोक  5.151.63-64 
केकया धृष्टकेतुश्च पुत्र: काश्यस्य चाभिभू:।
श्रेणिमान् वसुदानश्च शिखण्डी चापराजित:॥ ६३॥
हृष्टास्तुष्टा: कवचिन: सशस्त्रा: समलंकृता:।
राजानमन्वयु: सर्वे परिवार्य युधिष्ठिरम्॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
केकयराज धृष्टकेतु, काशीराज के पुत्र अभिभु, श्रीनिमान्, वसुदान और अपराजित वीर शिखण्डी, ये सभी पाँचों भाई, आभूषण और कवच धारण किये हुए, हाथों में शस्त्र लिये हुए, हर्ष और प्रसन्नता में भरे हुए, राजा युधिष्ठिर को चारों ओर से घेरकर उनके साथ चल रहे थे।
 
The five brothers, the prince of Kekaya, Dhrishtaketu, Abhibhu, son of the King of Kashi, Shreniman, Vasudana and the undefeated hero Shikhandi, all of them, wearing ornaments and armour, holding weapons in their hands, filled with joy and delight, surrounded King Yudhishthira from all sides and were going along with him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)