श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 151: पाण्डवपक्षके सेनापतिका चुनाव तथा पाण्डव-सेनाका कुरुक्षेत्रमें प्रवेश  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  5.151.44 
कृतास्त्रं मन्यते बाल आत्मानमविचक्षण:।
धार्तराष्ट्रो बलस्थं च पश्यत्यात्मानमातुर:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन युद्ध के लिए आतुर है। मूर्ख और अयोग्य होते हुए भी वह अपने को युद्धकला में निपुण समझता है और दुर्बल होते हुए भी अपने को बलवान समझता है॥ 44॥
 
‘Dhritarashtra's son Duryodhana is eager for war. Despite being foolish and unfit, he considers himself an expert in the art of warfare and despite being weak, he considers himself strong.॥ 44॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas