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mahabharat 5.151.37-38: अतः श्रेष्ठ वक्ता श्रीकृष्ण को अपना मत प्रकट करना चाहिए। अभी रात्रि हो चुकी है। हम लोग सेनापति का चुनाव करेंगे और रात्रि बीत जाने पर शस्त्र स्थापना (गंध आदि से पूजन), चमत्कार (रक्षाबंधन आदि) तथा शुभ कर्म (स्वस्ति वाचन आदि) करके श्रीकृष्ण की आज्ञा से युद्धभूमि की ओर प्रस्थान करेंगे।   |   mahabharat अध्याय 5.151: पाण्डवपक्षके सेनापतिका चुनाव तथा पाण्डव-सेनाका कुरुक्षेत्रमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 151: पाण्डवपक्षके सेनापतिका चुनाव तथा पाण्डव-सेनाका कुरुक्षेत्रमें प्रवेश  »  श्लोक 37-38
 
 
श्लोक  5.151.37-38 
ब्रवीतु वदतां श्रेष्ठो निशा समभिवर्तते।
तत: सेनापतिं कृत्वा कृष्णस्य वशवर्तिन:॥ ३७॥
रात्रे: शेषे व्यतिक्रान्ते प्रयास्यामो रणाजिरम्।
अधिवासितशस्त्राश्च कृतकौतुकमङ्गला:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
अतः श्रेष्ठ वक्ता श्रीकृष्ण को अपना मत प्रकट करना चाहिए। अभी रात्रि हो चुकी है। हम लोग सेनापति का चुनाव करेंगे और रात्रि बीत जाने पर शस्त्र स्थापना (गंध आदि से पूजन), चमत्कार (रक्षाबंधन आदि) तथा शुभ कर्म (स्वस्ति वाचन आदि) करके श्रीकृष्ण की आज्ञा से युद्धभूमि की ओर प्रस्थान करेंगे।
 
Therefore, Sri Krishna, the best of speakers, should express his opinion. It is night now. We will elect a commander and after the night is over, we will install the weapons (worship with fragrance etc.), perform miracles (Rakshabandhan etc.) and perform auspicious deeds (Swasti recitation etc.), and then under the command of Sri Krishna, we will travel to the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)