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mahabharat 5.151.35: तत्! यही ईश्वर हमारी जय-पराजय का मूल कारण है। हमारा जीवन, स्थिति, भाव, अभाव और सुख-दुःख इन्हीं पर निर्भर हैं। 35॥   |   mahabharat अध्याय 5.151: पाण्डवपक्षके सेनापतिका चुनाव तथा पाण्डव-सेनाका कुरुक्षेत्रमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 151: पाण्डवपक्षके सेनापतिका चुनाव तथा पाण्डव-सेनाका कुरुक्षेत्रमें प्रवेश  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.151.35 
एष नो विजये मूलमेष तात विपर्यये।
अत्र प्राणाश्च राज्यं च भावाभावौ सुखासुखे॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
तत्! यही ईश्वर हमारी जय-पराजय का मूल कारण है। हमारा जीवन, स्थिति, भाव, अभाव और सुख-दुःख इन्हीं पर निर्भर हैं। 35॥
 
Tat! This God is the root cause of our victory or defeat. Our life, state, feelings, deprivation and happiness and sorrow depend on these. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)