| श्री महाभारत » पर्व 5: उद्योग पर्व » अध्याय 151: पाण्डवपक्षके सेनापतिका चुनाव तथा पाण्डव-सेनाका कुरुक्षेत्रमें प्रवेश » श्लोक 29-32 |
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| | | | श्लोक 5.151.29-32  | भीमसेन उवाच
वधार्थं य: समुत्पन्न: शिखण्डी द्रुपदात्मज:।
वदन्ति सिद्धा राजेन्द्र ऋषयश्च समागता:॥ २९॥
यस्य संग्राममध्ये तु दिव्यमस्त्रं प्रकुर्वत:।
रूपं द्रक्ष्यन्ति पुरुषा रामस्येव महात्मन:॥ ३०॥
न तं युद्धे प्रपश्यामि यो भिन्द्यात् तु शिखण्डिनम्।
शस्त्रेण समरे राजन् संनद्धं स्यन्दने स्थितम्॥ ३१॥
द्वैरथे समरे नान्यो भीष्मं हन्यान्महाव्रतम्।
शिखण्डिनमृते वीरं स मे सेनापतिर्मत:॥ ३२॥ | | | | | | अनुवाद | | भीमसेन बोले—राजन्! द्रुपदपुत्र शिखण्डी का जन्म पितामह भीष्म को मारने के लिए ही हुआ है। यहाँ आये सिद्धों और महर्षियों ने यह बताया है। जब वह युद्धस्थल में अपने दिव्यास्त्र का प्रकटीकरण करता है, उस समय लोग उसका स्वरूप महात्मा परशुराम के समान देखते हैं। मुझे युद्ध में ऐसा कोई वीर पुरुष नहीं दिखाई देता, जो शिखण्डी को मार सके। राजन्! जब महाभक्त भीष्म अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित होकर रथ पर आरूढ़ होकर आगे बढ़ेंगे, तब द्वैत युद्ध में वीर शिखण्डी के अतिरिक्त कोई दूसरा योद्धा उन्हें नहीं मार सकेगा। अतः मेरे मत से वही प्रधान सेनापति होने के योग्य है। | | | | Bhimsena said— King! Drupada's son Shikhandi was born only to kill Grandfather Bhishma. This has been told by the Siddhas and Maharishis who had come here. When he manifests his divine weapon in the battlefield, at that time people see his form as that of Mahatma Parshuram. I do not see any such brave man who can kill Shikhandi in the war. King! When the great devotee Bhishma will come forward seated on a chariot, equipped with weapons, then in the Dwairath war, no other warrior can kill him except the valiant Shikhandi. Therefore, in my opinion, he is worthy of being the chief commander. | | ✨ ai-generated | | |
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