Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.150.8: राजन! मैंने पहले भी सब भाइयों में उत्तम भ्रातृ-प्रेम बनाए रखने की इच्छा से युक्ति का प्रयोग किया था, जिससे इस वंश में फूट न पड़े और प्रजा निरन्तर उन्नति करती रहे। 8॥ | mahabharat अध्याय 5.150: श्रीकृष्णका कौरवोंके प्रति साम, दान और भेदनीतिके प्रयोगकी असफलता बताकर दण्डके प्रयोगपर जोर देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
साम्यमादौ प्रयुक्तं मे राजन् सौभ्रात्रमिच्छता।
अभेदायास्य वंशस्य प्रजानां च विवृद्धये॥ ८॥
अनुवाद
राजन! मैंने पहले भी सब भाइयों में उत्तम भ्रातृ-प्रेम बनाए रखने की इच्छा से युक्ति का प्रयोग किया था, जिससे इस वंश में फूट न पड़े और प्रजा निरन्तर उन्नति करती रहे। 8॥
Rajan! I had used the strategy before with the desire to maintain the best fraternal love among all the brothers, so that there would be no division in this dynasty and the people would continue to progress. 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥