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mahabharat 5.150.6-7: प्रजानाथ! अब आप भी जो उचित समझें, वही करें। भरत! कौरव सभा में भीष्म, द्रोण, विदुर, गांधारी और धृतराष्ट्र ने मेरे सामने जो कुछ कहा था, वह सब मैंने आपको बता दिया है। राजन! उस स्थान की कथा यह है। 6-7।   |   mahabharat अध्याय 5.150: श्रीकृष्णका कौरवोंके प्रति साम, दान और भेदनीतिके प्रयोगकी असफलता बताकर दण्डके प्रयोगपर जोर देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.150.6-7 
यदत्र युक्तं प्राप्तं च तद् विधत्स्व विशाम्पते।
उक्तं भीष्मेण यद् वाक्यं द्रोणेन विदुरेण च॥ ६॥
गान्धार्या धृतराष्ट्रेण समक्षं मम भारत।
एतत् ते कथितं राजन् यद् वृत्तं कुरुसंसदि॥ ७॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! अब आप भी जो उचित समझें, वही करें। भरत! कौरव सभा में भीष्म, द्रोण, विदुर, गांधारी और धृतराष्ट्र ने मेरे सामने जो कुछ कहा था, वह सब मैंने आपको बता दिया है। राजन! उस स्थान की कथा यह है। 6-7।
 
Prajanath! Now you also do whatever you think is right. Bharat! I have told you everything that Bhishma, Drona, Vidur, Gandhari and Dhritarashtra had said in front of me in the Kaurava Sabha. King! This is the story of that place. 6-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)