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न ते राज्यं प्रयच्छन्ति विना युद्धेन पाण्डव।
विनाशहेतव: सर्वे प्रत्युपस्थितमृत्यव:॥ २०॥
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! वे कौरव बिना युद्ध किये तुम्हें राज्य नहीं देंगे। उनके विनाश का कारण एकत्रित हो चुका है और उनकी मृत्यु का समय भी आ पहुँचा है।
O son of Pandu! Those Kauravas will not give you the kingdom without a fight. The cause for their destruction has been gathered and their time of death has also arrived.
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि श्रीकृष्णवाक्ये पञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें श्रीकृष्णवाक्यविषयक एक सौ पचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥