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mahabharat 5.150.18: मेरे ऐसा कहने पर भी उस दुष्टात्मा ने तुम्हारे लिए राज्य का कुछ भाग नहीं छोड़ा, अर्थात् देने को तैयार नहीं हुआ। अब मैं उन पापियों पर दण्ड की चौथी विधि का प्रयोग करने की आवश्यकता समझता हूँ, अन्यथा उन्हें सही मार्ग पर लाना असंभव है। 18.   |   mahabharat अध्याय 5.150: श्रीकृष्णका कौरवोंके प्रति साम, दान और भेदनीतिके प्रयोगकी असफलता बताकर दण्डके प्रयोगपर जोर देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.150.18 
एवमुक्तोऽपि दुष्टात्मा नैव भागं व्यमुञ्चत।
दण्डं चतुर्थं पश्यामि तेषु पापेषु नान्यथा॥ १८॥
 
 
अनुवाद
मेरे ऐसा कहने पर भी उस दुष्टात्मा ने तुम्हारे लिए राज्य का कुछ भाग नहीं छोड़ा, अर्थात् देने को तैयार नहीं हुआ। अब मैं उन पापियों पर दण्ड की चौथी विधि का प्रयोग करने की आवश्यकता समझता हूँ, अन्यथा उन्हें सही मार्ग पर लाना असंभव है। 18.
 
Even after I said this, that evil soul did not leave any part of the kingdom for you, that is, he did not agree to give it. Now I see the need to use the fourth method of punishment on those sinners, otherwise it is impossible to bring them on the right path. 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)