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mahabharat 5.150.11: हे भारत! वहाँ मैंने अनेक अद्भुत, भयंकर, क्रूर और अमानवीय कर्म किये॥11॥   |   mahabharat अध्याय 5.150: श्रीकृष्णका कौरवोंके प्रति साम, दान और भेदनीतिके प्रयोगकी असफलता बताकर दण्डके प्रयोगपर जोर देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.150.11 
अद्‍भुतानि च घोराणि दारुणानि च भारत।
अमानुषाणि कर्माणि दर्शितानि मया विभो॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! वहाँ मैंने अनेक अद्भुत, भयंकर, क्रूर और अमानवीय कर्म किये॥11॥
 
Bharat! There I performed many amazing, terrible, cruel and inhuman deeds. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)