Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.15.7: कल्याणी! मैं आपका भक्त हूँ, कृपया मुझे स्वीकार करें। मनस्विनी! आप क्या चाहती हैं? सुमध्यमे! आपका जो भी कार्य हो, मैं उसे पूर्ण करूँगा।॥ 7॥   |   mahabharat अध्याय 5.15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.15.7 
भक्तं मां भज कल्याणि किमिच्छसि मनस्विनि।
तव कल्याणि यत् कार्यं तत् करिष्ये सुमध्यमे॥ ७॥
 
 
अनुवाद
कल्याणी! मैं आपका भक्त हूँ, कृपया मुझे स्वीकार करें। मनस्विनी! आप क्या चाहती हैं? सुमध्यमे! आपका जो भी कार्य हो, मैं उसे पूर्ण करूँगा।॥ 7॥
 
‘Kalyani! I am your devotee, please accept me. Manasvini! What do you want? Sumadhyame! Whatever your task is, I will accomplish it.॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)