श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.15.34 
अद्भॺोऽग्निर्ब्रह्मत: क्षत्रमश्मनो लोहमुत्थितम्।
तेषां सर्वत्रगं तेज: स्वासु योनिषु शाम्यति॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
जल से अग्नि, ब्राह्मण से क्षत्रिय और पत्थर से लोहा उत्पन्न हुआ। इनका तेज सर्वत्र कार्य करता है। किन्तु अपने कारणात्मक पदार्थों के आने पर यह बुझ जाता है॥ 34॥
 
Fire was created from water, Kshatriya from Brahmin and iron from stone. Their brilliance works everywhere. But it gets extinguished when it comes to its causal substances.॥ 34॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि सेनोद्योगपर्वणि बृहस्पत्यग्निसंवादे पञ्चदशोऽध्याय:॥ १५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत सेनोद्योगपर्वमें बृहस्पति-अग्निसंवादविषयक पंद्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)