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mahabharat 5.15.31: अग्निदेव बोले - बृहस्पति! मैंने इस संसार में कहीं भी देवताओं के राजा को नहीं देखा है, केवल जल ही बचा है जहाँ मैंने उनकी खोज नहीं की है। किन्तु मैं जल में प्रवेश करने का साहस कभी नहीं कर सकता हूँ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 5.15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.15.31 
अग्निरुवाच
बृहस्पते न पश्यामि देवराजमिह क्वचित्।
आप: शेषा: सदा चाप: प्रवेष्टुं नोत्सहाम्यहम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
अग्निदेव बोले - बृहस्पति! मैंने इस संसार में कहीं भी देवताओं के राजा को नहीं देखा है, केवल जल ही बचा है जहाँ मैंने उनकी खोज नहीं की है। किन्तु मैं जल में प्रवेश करने का साहस कभी नहीं कर सकता हूँ॥31॥
 
Agnidev said - Brihaspati! I have not seen the king of gods anywhere in this world, only water is left where I have not searched for him. But I can never dare to enter the water. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)